युवाओं में ई-शॉपिंग का क्रेज इन दिनों बहुत बढ़ गया है। वे कपड़े, जूते, ज्वैलरी, घड़ी आदि सामान की खरीदारी के लिए दुकान जाने की जगह ई-तकनीक अपना रहे हैं। ऑन लाइन शॉपिंग में ढेरों वेराइटियां और मार्केट में नहीं मिलने वाले प्रोडक्ट के भी मिलने से युवा आकर्षित हैं। 

यूथ में ई-शॉपिंग का सबसे ज्यादा क्रेज है। शुरुआत में ई-शॉपिंग करने के दौरान वे यूजर्स थोड़ी दुविधा में थे कि पता नहीं ऑर्डर करने पर किस तरह की चीज घर पहुंचेगी। एक-दो बार शॉपिंग करने के बाद उन्हें समझ में आया कि ई-शॉपिंग बहुत आसान है। इसमें बिलकुल सही चीज मिलती है। ई-शॉपिंग से महंगा सामान खरीदने पर कई बार गारंटी नहीं मिलती। ऐसी स्थिति में बाद में मुश्किल हो सकती है, इसलिए सिर्फ छोटे सामान, जैसे—ड्रेसेज, बैग्स, शूज और गॉगल्स खरीदना ज्यादा बेहतर होता है। नेट पर 1500 से 5000 रुपए तक ही शॉपिंग करना वे ज्यादा सही मानते हैं। खरीदने से पहले नेट के जरिए सामान की बहुत अच्छी डिटेल मिल जाती है, इसीलिए खरीदने में आसानी होती है।

ऑन लाइन शॉपिंग की बढ़ती लोकप्रियता कई कारण हैं। जैसे यहां मिनटों में मनपसंद ब्रांड्स आसानी से मिल जाते हैं, जबकि बाजारों में घंटों ढूंढ़ने पर भी ऐसा नहीं होता। साथ ही पर्याप्त स्टॉक और साइज की भी दिक्कत नहीं होती। एक रिसर्च के मुताबिक बाजार में शॉपिंग के दौरान हम गैर जरूरी सामान भी खरीद लेते हैं। जबकि ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान हम सिर्फ जरूरी सामान ही देखते हैं। वेबसाइट खोलिए। पसंद का उत्पाद चुनिए और फिर ऑर्डर कर दीजिए। भुगतान चाहें तो ऑनलाइन करें या घर आने के बाद। स्मार्ट फोन ने इसे और भी आसान बना दिया है। ऑन लाइन शॉपिंग की यह छोटी प्रक्रिया अब त्योहारों पर पारंपरिक खुदरा बाजार में बम की तरह फटी है। रिटेलर्स में तहलका है। किताबें, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम और कॉस्मेटिक आदि के लिए बहुतों ने बाजार जाना ही बंद कर दिया है। खरीदारी के विकल्प भी कई। नतीजा बाजार बेहाल। सबसे ज्यादा असर इलेक्ट्रॉनिक आइटम खासकर मोबाइल बिक्री पर पड़ा है।

अब हाल यह है कि बढ़ते ऑनलाइन खरीदार खुदरा कारोबारियों के लिए अब चिंता का विषय बन गए हैं। मोबाइल जैसे उत्पादों का हाल यह है कि अधिकांश खरीदार दुकान पर केवल डेमो देखने आते हैं। ऑर्डर वे ऑनलाइन ही करते हैं। इस तरह ग्राहक तो खुश हैं, लेकिन देश में उद्योग व व्यापार मंडल दुखी है। त्योहारों पर ई शॉपिंग के बढ़ते क्रेज से रिटेल कारोबार प्रभावित हो रहा है। प्रदेश में अधिकतर थोक व्यापारियों की भी मांग है कि ऑनलाइन शॉपिंग के लिए ऐसी नीतियां बनाए  जिससे उद्योग घरेलू प्रभावित न हों।

ऑनलाइन शॉपिंग भारत में तेजी से बढ़ रही है। माइकल आल्ड्रिक द्वारा 1979 में प्रस्तुत टेली शॉपिंग कांसेप्ट ही आज की ऑनलाइन शॉपिंग है। ब्रिटेन में लिखित संदेश भेजने की सेवा के साथ इसकी शुरुआत हुई। 1994 में पिज्जा पहुंचाने के लिए ऑनलाइन आर्डर लेना शुरू किया था। 1995 में अमेजन डॉट कॉम ने कंप्यूटर पार्ट्स सहित लगभग 20 वस्तुएं ऑनलाइन बेचना शुरू किया और 2003 में कारोबार के फायदे का खुलासा किया। 2007 में ऑनलाइन शॉपिंग का प्रसार करने वाले फ्लिपकार्ट डॉट कॉम ने भारतीय ग्राहकों को देखते हुए कैश ऑन डिलीवरी का प्रयोग शुरू किया। इससे लोगों में भरोसा जगाया और आज भारत में इसी तरह लगभग 80 प्रतिशत ऑनलाइन शॉपिंग हो रही है। जून 2014 तक भारत के 250 मिलियन ऑनलाइन यूजर्स में से 10 मिलियन ऑनलाइन ही शॉपिंग करते हैं। प्रमुख ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल नीचे दिए गए हैं—

1) http://www.amazon.in 

2) http://www.flipkart.com 

3) http://www.snapdeal.com 

4. http://www.jabong.com 

5. http://www.myntra.com 

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के इस युग में आज मानव ने हर प्रकार की सुविधाएं प्राप्त कर ली हैं। इन्फॉर्मेशन (information) टेक्नोलॉजी की बढ़ती पहुंच ने मानव जीवन को सुगम बना दिया है। इंटरनेट के माध्यम से आज हम घर बैठे-बैठे न सिर्फ दुनियाभर की जानकारी जुटा सकते हैं, बल्कि ई-शॉपिंग का आनंद भी उठा सकते हैं। 

ई-शॉपिंग का अर्थ है—इंटरनेट के द्वारा मनपसंद सामग्रियों की खरीददारी करना। टाटा संस के चेयनमैन रतन टाटा का कहना है, ‘‘भारत में खरीददारों की काफी संख्या होने के बावजूद लोग बाजार जाकर सामान नहीं खरीद पाते, किंतु आज देश में ई-शॉपिंग का चलन इतना अधिक बढ़ गया है कि 500 से 600 मिलियन लोग इस माध्यम से खरीददारी कर रहे हैं। सचमुच आज देश में ऑनलाइन शॉपिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है। एसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2009 में भारत में ऑनलाइन मार्केट 2.5 अरब डॉलर का था, जो वर्ष 2013 में बढ़कर 16 अरब डॉलर का हो गया और वर्ष 2023 तक इसका कारोबार 56 अरब डॉलर तक पहुंच जाने का अनुमान है। जो देश की रिटेल मॉर्केट (खुदरा बाजार) का 6.5% है। वर्ष 2014 में जारी रिपोर्ट कहती है—ऑनलाइन खरीददारी में बंबई, बांबे (मुंबई) पहले स्थान, अहमदाबाद दूसरे और दिल्ली तीसरे स्थान पर है।

एसोचैम के डी.एस. रावत कहते हैं—आज सड़कों और बाजारों की भीड़, महंगा होता पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी के मध्य मॉल अथवा बाजारों में जाने हेतु समय निकालना कठिन हो गया है। इन्हीं सब परेशानियों से बचने के लिए लोग ऑनलाइन खरीददारी करना अधिक पसंद करते हैं।’’ रावत का यह भी मानना है—बढ़ती महंगाई और सुस्त आर्थिक विकास दर ऑनलाइन की खरीददारी के बढ़ते चलन को रोक पाने में असफल रहा है, बल्कि इंटरनेट के प्रसार ओर भुगतान के नए विकल्प के कारण ई-कॉमर्स उद्योग को बढ़ावा ही मिला है। इसके बावजूद तमाम सुविधाओं और बेहतर सर्विस के कारण आज ई-शॉपिंग भारत के युवा वर्ग की पहली पसंद बनती जा रही है। वहीं दूसरी ओर ऑनलाइन मार्केटिंग का व्यापक विस्तार होने के कारण इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार पैदा होने के अवसर भी खुले हैं। व्यापार जगत के विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दो-तीन वर्षों में ई-कॉमर्स के क्षेत्र में 50 हजार लोगों को रोजगार प्राप्त हो सकेगा। स्वयं रतन टाटा जैसे उद्योगपतियों का कहना है—‘‘ई-कॉमर्स उन क्षेत्रों में से एक है, जहां मैं व्यक्तिगत रूप से निवेश करना चाहता हूं, क्योंकि देश के खरीदारों के उस बड़े वर्ग के लिए जो बाजार जाकर चीजें नहीं खरीद सकते उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प है।’’

ई-शॉपिंग आज एक वास्तविकता है। उसे कम करने के लिए देश में परम्परागत फुटकर व्यापार को अधिक गुणवत्ता सम्पन्न तथा सस्ता एवं सहज बनना होगा।

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